Saturday, 18 July 2015

MONSOON सत्र: आखिरकार गतिरोध खत्म, कर्जमाफी पर आज जवाब देगी सरकार

मुंबई. विधानमंडल के मानसून सत्र में पिछले तीन दिनों से जारी गतिरोध गुरुवार को खत्म हो गया। दोनों सदनों में किसानों के कर्ज माफी के मुद्दे पर चर्चा हुई। विधानसभा में राकांपा के अजित पवार ने कर्ज माफी की मांग करते हुए कहा कि पड़ोसी देश नेपाल को आर्थिक मदद देने के लिए सरकार के पास धन है, तो किसानों की मदद के लिए क्यों नहीं। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत यह स्पष्ट कर दिया कि किसानों की समस्या के हल के लिए कर्ज माफी ही एकमात्र विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार शुक्रवार को चर्चा का विस्तृत जवाब देगी।

इसके पहले नेता प्रतिपक्ष राधकृष्ण विखे पाटील ने राज्य में मानसून की बेरुखी से प्रभावित हो रही खेती को लेकर नियम 293 के तहत चर्चा का प्रस्ताव रखा था। चर्चा में भाग लेते हुए अजित ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल को करोड़ों रुपए दिए हैं तो किसानों की मदद करने में सरकार क्यों पीछ हट रही है। अजित ने मुख्यमंत्री की ओर मुखातिब होकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आप की बात सुनते हैं। आपको (फडणवीस) इसका लाभ उठाते हुए किसानों की मदद करनी चाहिए।
वहीं, विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष धनंजय मुंडे ने कहा कि सरकार किसानों के कर्ज का पुनर्गठन करने का दावा कर रही है, जो अब तक नहीं हुआ। इसलिए किसान कर्ज माफी की घोषणा तुरंत करनी चाहिए। इस मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों ने सभापति के आसन के समक्ष नारेबाजी की। इसकी वजह से सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही फिर शुरू होने पर संसदीय कार्य विभाग का अतरिक्त प्रभार संभाल रहे मंत्री प्रकाश मेहता के बयान के बाद विपक्षी सदस्य फिर से चर्चा के लिए तैयार हुआ।
'कर्ज माफी करवाकर दिखाए शिवसेना'
विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष धनंजय मुंडे ने भाजपा-नीत सरकार की प्रमुख सहयोगी शिवसेना को चुनौती दी। कहा कि यदि उसमें ताकत है तो किसानों की कर्ज माफी करवाकर दिखाए। मुंडे ने कहा कि हमें इस बात की खुशी है कि कर्ज माफी के मुद्दे पर शिवसेना विपक्ष के साथ दिख रही है। वह (शिवसेना) सत्ता के आगे लाचार भी नजर आ रही है। शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कर्ज मुक्ति की वकालत की है। इसलिए शिवसेना के मंत्रियों को चाहिए कि वे किसान कर्ज माफी की घोषणा सरकार से करवाएं। इस पर शिवसेना की नीलम गोर्हे मुंडे की तरफ मुखातिब होते हुए कहा कि शिवसेना सत्ता के आगे लाचार नहीं है।

किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं है। सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। पिछले नौ माह में 1803 किसान आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। - राधकृष्ण विखे पाटील, नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा

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