महाराष्ट्र में नहीं है जल्लाद, याकूब को फांसी देने के लिए यूपी का पवन तैयार -
पुणे। 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की क्यूरेटिव पिटीशन सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किये जाने के बाद नागपुर की सेंट्रल जेल में फांसी होनी तय है।
सूत्रों की माने तो 30 जुलाई को याकूब को फांसी दी जा सकती है। इसी दिन याकूब मेमन का जन्मदिन भी है। इस फैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार के सामने एक बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। महाराष्ट्र की दोनों सेंट्रल जेलों (पुणे और नागपुर) में फांसी देने के लिए कोई भी जल्लाद नहीं है। इन सब के बीच मेरठ के जल्लाद पवन कुमार ने महाराष्ट्र सरकार से याकूब मेमन को फांसी की जिम्मेदारी देने की मांग की है।
30 साल पहले हुई थी फांसी
नागपुर जेल में करीब 30 वर्ष बाद किसी कैदी को फांसी दी जाने वाली है। इससे पहले 1984 में अमरावती के रहने वाले वानखेड़े भाइयों को हत्या के एक मामले में फांसी दी गई थी। अब तक 23 कैदियों को फांसी दी जा चुकी है।
याकूब को फांसी देने की पूरी प्रक्रिया जेल मैनुअल के अनुसार करीब पांच घंटे चलेगी। वहीं पुणे की यरवदा जेल में 26/11 के एकमात्र जिंदा बचे आतंकी अजमल कसाब को फांसी दी गई थी।
सरकार के सामने दो विकल्प
कसाब को फांसी देने के लिए जेल विभाग ने किसी तरह एक रिटायर्ड जल्लाद को तैयार किया था। हालांकि नागपुर जेल सुपरिटेंडेंट योगेश देसाई की माने तो जल्लाद का इंतजाम जल्द ही हो जाएगा।
जेल विभाग के सूत्रों की माने तो कसाब की तरह ही किसी रिटायर्ड जल्लाद के हाथों फांसी की प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है और दूसरे विकल्प के रूप में किसी और राज्य से जल्लाद बुलाया जा सकता है। हालांकि इस मामले में अंतिम निर्णय राज्य के गृह विभाग और जेल अधिकारियों को लेना है।
कौन है पवन जल्लाद
बताते चलें कि पवन पुश्तैनी जल्लाद है। उसके पिता और दादा जल्लाद का काम करते थे। यूपी में पवन अकेला जल्लाद है। निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कौली को फांसी देने की सजा होने पर पवन काफी चर्चाओं में आया था। सुरेंद्र कौली को फांसी देने की जिम्मेदारी उसे ही मिली थी। उसने अपनी सभी तैयारी भी पूरी कर ली थी, लेकिन फांसी देने से पहले ही एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कौली की सजा अगली सुनवाई तक स्थगित कर दी थी।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा है पवन
महाराष्ट्र सरकार की इस परेशानी के बीच मेरठ के जल्लाद पवन कुमार ने आगे आते हुए याकूब मेमन को फांसी की जिम्मेदारी स्वीकार करने की बात कही है। असल में पवन इन दिनों आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। उसे उम्मीद है कि अगर सरकार मंजूरी देती है तो उसे कुछ पैसे मिल जायेंगे और उसकी आर्थिक स्थिति में थोड़ा सुधर आ जायेगा। पवन को उत्तर प्रदेश सरकार से सिर्फ तीन हजार की रुपए की तनख्वाह मिलती हैं, जो पिछले चार महीने से नहीं मिली है। उसके दो बेटे और एक बेटी है। तीनों अभी पढ़ाई कर रहे हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह गांव-मोहल्लों में जाकर फेरी लगाकर कपड़े बेचता है। जो पैसे बचते हैं उनसे किसी तरह परिवार का गुजर-बसर करता है। उसके अनुसार, इस महंगाई में तीन हजार रुपए से परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल है। दूसरी ओर, बेटी की शादी भी करनी है।

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