Wednesday, 29 July 2015

कलाम का पार्थिव शरीर रामेश्वरम रवाना, कल अंतिम संस्कार में शामिल होंगे मोदी

कलाम का पार्थिव शरीर रामेश्वरम रवाना, कल अंतिम संस्कार में शामिल होंगे मोदी

नई दिल्ली/रामेश्वरम. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे. अब्दुल कलाम का पार्थिव शरीर बुधवार को नई दिल्ली से रामेश्वरम ले जाया जा रहा है। उन्हें गुरुवार को वहीं सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
कलाम का गुरुवार को उनके गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई मुख्यमंत्री इस दौरान मौजूद रहेंगे। कलाम का सोमवार को शिलांग में आईआईएम के एक प्रोग्राम में लेक्चर देते वक्त हार्ट अटैक से निधन हो गया था। तमिलनाडु के रामेश्वरम के श्वार्ट्ज स्कूल में डॉ. कलाम का पार्थिव शरीर आम लोगों के दर्शनों के लिए रखा जाएगा। यह वही स्कूल है, जहां कलाम ने अपनी पढ़ाई पूरी की थी। 
अपने नाम पर नहीं रखने दिया था स्कूल के एक ब्लॉक का नाम
रामनाथपुरम के श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल टी. पॉल मारन उदास हैं। स्कूल में कलाम का एक बड़ा फोटोग्राफ लगा है। वे कलाम को अपने स्कूल का ग्रेट स्टूडेंट बताते हैं। यहां से रामेश्वरम केवल 50 किलोमीटर दूर है। मारन बताते हैं, “कलाम को जब भी टाइम मिलता था, वे इस स्कूल में आकर स्टूडेंट्स से जरूर मिलते थे। एक बार हमने कहा कि हम स्कूल के नए ब्लॉक का नाम आपके नाम पर रखना चाहते हैं, तो कलाम ने इससे साफ इनकार कर दिया। आप समझ सकते हैं कि वे उसूलों के कितने पक्के इंसान थे।”
दोस्त को है इंतजार
वी. स्टीफन जेयासीलन कलाम के दोस्त हैं। कलाम से उनकी आखिरी मुलाकात साल 2000 में हुई थी। यह मुलाकात दोनों के स्कूल छोड़ने के पूरे 50 साल बाद हुई थी। स्टीफन बताते हैं कि स्कूल के एक टीचर ने कलाम की मेमोरी चेक करने की कोशिश की। टीचर ने मेरी तरफ इशारा करके कलाम से पूछा कि क्या वे मुझे पहचानते हैं? लेकिन कलाम मुझे नहीं पहचान पाए। इसके बाद टीचर ने कलाम से पूछा, “क्या आप अपने पुराने क्लास टीचर जे. इसाक वेलामुथु को जानते हैं? इसके बाद कलाम मेरे पास आए और कंधे पर हाथ रखा। इसाक स्टीफन मेरे पिता थे। कलाम ने तुरंत मुझे मेरा नाम बता दिया।” स्टीफन के मुताबिक, “कलाम ने दुनियाभर में स्टूडेंट्स को लेक्चर दिए, लेकिन वह खुद कभी अपने टीचर्स को नहीं भूले। वे अपने टीचर्स की बहुत इज्जत करते थे।” 
बचपन में भी वही बड़े बाल और किताबों का शौक
स्टीफन बताते हैं कि कलाम को दुनिया ने जैसा देखा है, वे बचपन में भी वैसे ही थे। लंबे बाल रखते थे जो बिखरे रहते थे। जब बाकी बच्चे फ्री टाइम में फुटबॉल खेल रहे होते थे, तब कलाम किसी पेड़ के नीचे बैठकर किताबें पढ़ रहे होते थे। वे हॉस्टल में रहते थे जहां उन्हें खाने के लिए 2 रुपए महीना देना होता था। डिबेट हो या कुछ और कलाम हमेशा जीतते थे। गरीब फैमिली से आने वाले कलाम की फीस कई बार तो उनके टीचर ही देते थे। स्टीफन के मुताबिक, “1970 के आसपास जब कलाम का नाम अखबारों में छपने लगा तो हमें पता लगा कि वो कितने बड़े साइंटिस्ट हो चुके थे।”  
भाई से करते रहते थे बात
कलाम के बड़े भाई एपीजेएम माराईयार 96 साल के हो चुके हैं और अपनी बेटी के साथ रहते हैं। वे बताते हैं कि कलाम अकसर उन्हें फोन करते थे। उनकी बेटी बताती हैं कि कलाम जब भी फोन करते तो मुझसे कहते कि भैया से बात कराते वक्त फोन का स्पीकर ऑन कर दो, ताकि वे उनसे ठीक से बात कर सकें। कलाम के एक रिश्तेदार बताते हैं कि देश और दुनिया की इतनी बड़ी हस्ती होने के बावजूद कलाम कहते थे कि कभी मेरे नाम का इस्तेमाल करने की कोशिश मत करना। कलाम के गांव की एक महिला बताती हैं, “मेरे पिता ने एक हिंदू महिला से शादी की तो सोसाइटी हमारे खिलाफ हो गई, लेकिन कलाम ने उस वक्त भी मेरे पिता का साथ दिया। इसके बाद जब मैं 20 साल की हुई तो कलाम ने मुझे एक हजार रुपए दिए।

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