भ्रष्टाचार से कमाई 4 करोड़ की संपत्ति राजसात
कृषि साख सहकारी समिति के सचिव के खिलाफ हुई कार्रवाई ठ्ठ प्रदेश मेंं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पहला मामला
ग्वालियर, 13 दिसंबर. आय से अधिक संपत्ति रखने वाले प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पिपरौआ के सचिव की संपत्ति अंतत: ईओडब्ल्यू ने राजसात कर ली. जब्त की गई संपत्ति का बाजार मूल्य 4 करोड़ से भी अधिक हैं.
म.प्र.में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संपत्ति राजसात का यह पहला और देश में दूसरा मामला हैं. इससे पूर्व बिहार में संपत्ति राजसात का एक मामला हो चुका है. प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पिपरौआ के सचिव की भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति को राजसात विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार अधिनियम के विशेष न्यायाधीश एन.पी. सिंह द्वारा पारित आदेश के तहत की गई है.राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक विनीत खन्ना ने बताया कि प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति के सचिव बलभद्र पाराशर के चीनौर कॉलोनी, प्रीतमपुरा आदि निवासों पर गत 24 सितंबर को तलाशी एवं छापे की कार्रवाई विभिन्न शिकायतों के आधार पर की गई थी. छापे में बलभद्र पाराशर के पास से 3 लाख 62 हजार 120 रुपये नगद सोना, चांदी के आभूषण व 11 विभिन्न स्थानों पर अचल संपत्तियां मिली थी, जबकि पाराशर के अलावा उनके परिवार में अन्य कोई कमाने वाला नहीं हैं.
पाराशर अपने पास मिली संपत्ति का कोई स्रोत भी नहीं बता पाए थे. उनका पास मिली संपत्ति उनकी आय से काफी गुना अधिक पाई गई थी. छापे में मिली इस संपत्ति को राजसात करने हेतु विशेष न्यायालय ने आदेश पारित किया गया था. आदेश के विरुद्ध आरोपी पाराशर ने उच्च न्यायालय में अपील की थी, जिस पर उच्च न्यायालय ने अपील में स्टे खारिज कर दिया. इसके बाद विशेष न्यायालय ग्वालियर के न्यायाधीश एन.पी. सिंह के आदेश के परिपालन में कलेक्टर पी. नरहरि के आदेश पर जब्त संपत्तियों को राजसात कर लेने की कार्रवाई की गई.
यह सम्पत्ति हुई राजसात
राजसात की गई संपत्ति में बीमा पॉलिसियां, बैंक में जमा राशियां, नगदी, सोना-चांदी के आभूषण व 11 अचल कीमती संपत्तियां हैं. जिनका बाजार मूल्य 4 करोड से भी अधिक का बताया जाता हैं, जबकि शासकीय मूल्य 1 करोड़ से भी अधिक आंका गया है.
पहला मामला : खन्ना
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) के पुलिस अधीक्षक विनीत खन्ना के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी शासकीय सेवक की संपत्ति राजसात करने का यह पहला इतना बडा मामला हैं

No comments:
Post a Comment