Saturday, 25 July 2015

कुछ पैसे लेकर मुंबई आए थे मुंबई, आज फार्मा सेक्टर में चलता इनका नाम

कुछ पैसे लेकर मुंबई आए थे मुंबई, आज फार्मा सेक्टर में चलता इनका नाम

मुंबई।1979 में जब अजय 29 साल के थे, तब उनके पिता गोपीकृष्ण 55 साल की उम्र में चल बसे। गोपीकृष्ण राजस्थान के बगड़ से कुछ पैसे लेकर मुंबई आए थे और कपास की ट्रेडिंग में पैसा कमाकर मोरारजी मिल्स के मालिक बन गए थे। अजय के बड़े भाई अशोक ने घर और कामकाज संभाला लेकिन पांच साल बाद अशोक भी 36 साल की उम्र में कैंसर से चल बसे। एक और भाई दिलीप (वीआईपी लैंगवेज ) ने कामकाज अलग कर लिया था।
अब बड़े भाई की पत्नी उर्वी और 10 साल से छोटे उनके तीन बच्चे अजय की जिम्मेदारी थी। इस पर और मार तब पड़ी जब भाई के अलग होने को 16 दिन ही हुए थे और घर की पुश्तैनी टैक्सटाइल मिल ट्रेड यूनियन नेता दत्ता सामंत के कारण महीने भर बंद रही और कारोबार में भारी घाटा हुआ। लेकिन उस हालात को संभाला और 2006 तक मोरारजी टैक्सटाइल का काम देखते रहे। अशोक का बेटा हर्ष फार्मा बिज़नेस भी लंबे समय तक देखता रहा।
घर और कारोबार दोनों में परेशानी थी, लेकिन धारा के विपरीत चलकर जीतने को उन्होंने अपनी शैली बना लिया। जिस दौर में बहुराष्ट्रीय फार्मा कंपनियां भारत से जा रही थी, तब उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की निकोलस फार्मा को खरीदकर उसे पिरामल हैल्थकेअर बना दिया। उनको उस वक्त फार्मा के कारोबार की कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन पांच ही साल में कंपनी को देश की पांचवी सबसे बड़ी जेनरिक ड्रग कंपनी बना दिया। जिस दौर में विदेशी फार्मा कंपनियां भारत आ रही थी, तब 2010 में उन्होंने पिरामल हैल्थकेअर को 30 गुना अधिक दाम में अमेरिकी कंपनी अबॉट को बेचा। वे ‘प्रथम’ के चेयरमैन हैं, जो देश के शिक्षा क्षेत्र का सबसे बड़ा एनजीओ है और 3 करोड़ से ज्यादा बच्चों तक पहुंचा है। शिक्षा के प्रति रुझान उनके खून में है। उनके दादा सेठ पिरामल चतुर्भुज माखरिया ने आजादी के दौरान राजस्थान के झुनझुनू जिले के बगड़ में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला था।
-जन्म- 3 अगस्त 1955
-पिता- गोपीकृष्ण (व्यवसायी)
-शिक्षा- जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़, मुंबई से एमबीए
-परिवार- स्वाति पिरामल, बेटा आनंद और बेटी नंदिनी
-क्यों चर्चा में- उनके रियल्टी प्रोजेक्ट में अब तक सबसे अधिक एफडीआई लगने जा रहा है।


No comments: