Saturday, 18 July 2015

मुंबई. महाराष्ट्र से गुजरात को एक बूंद भी पानी नहीं दिया जाएगा। आघाडी सरकार ने दूसरे राज्य को पानी देने की कोशिश की थी, जिसे हमने वापस लाने का कार्य किया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में यह जानकारी दी।
प्रश्नकाल में राकांपा के जितेंद्र आव्हाड, शशिकांत शिंदे आदि सदस्यों ने दमणगंगा-पिंजाल और पार-तापी नदीजोड़ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने को लेकर सवाल किया था। इस दौरान राकांपा के छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार महाराष्ट्र का पानी गुजरात को देना चाहती है। राकांपा के ही दिलीप वलसे पाटील ने कहा कि 16 जनवरी 2015 को मुख्यमंत्री द्वारा लिखे पत्र में 18 टीएमसी पानी गुजरात को देने का आश्वासन दिया गया था।
इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि विपक्ष इस मसले पर राजनीति न करे। आघाडी सरकार ने गुजरात को पानी देने का फैसला लिया था। पर हमारी सरकार महाराष्ट्र के हिस्से का एक बूंद पानी गुजरात को नहीं देगी। इसके पहले जलसंसाधन राज्यमंत्री विजय शिवतारे ने बताया कि दमणगंगा-पिंजाल व पार-तापी-नर्मदा नदी जोड़ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने को लेकर केंद्र सरकार का रुख सकारात्मक है। इस बारे में केंद्रीय जलसंसाधन मंत्री उमा भारती ने हमें आश्वासन दिया है।
मराठवाडा : 15 परियोजनाएं इस साल होंगी पूरी 
मराठवाडा की 15 सिंचाई परियोजनाएं इस साल पूरी की जाएंगी। सरकार ने फैसला किया है कि पहले उन परियोजनाओं का कार्य पूरा करने के लिए धन दिया जाएगा, जिनका 70 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। राज्य के जलसंसाधन मंत्री गिरीष महाजन ने विधानसभा को यह जानकारी दी। 
प्रश्नकाल में शिवसेना के अर्जुन खोतकर ने मराठवाडा की 129 अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को लेकर सवाल किया था। खोतकर ने पूछा कि मराठवाडा की अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 12 हजार करोड़ की जरूरत है।
सरकार यह निधि कब तक देगी। में मंत्री ने कहा कि राज्य की निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 80 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। मराठावाडा की सिंचाई परियोजनाओं को लेकर मराठवाडा के सर्वदलीय विधायक एकजुट हो गए और सरकार से जवाब देने की मांग करने लगे। इस पर जलसंसाधन मंत्री महाजन ने कहा कि मराठवाडा के सदस्यों की भावनाओं को देखते हुए इस संबंध में सदन में अलग से चर्चा की जाएगी।
भ्रष्टाचार साबित हुआ तो दे दूंगा इस्तीफा
विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखेपाटील ने कहा कि यदि उनके कृषि मंत्री के कार्यकाल में उनके किसी भ्रष्टाचार में शामिल होना साबित हो जाए तो वे तुरंत इस्तीफा दे देंगे। प्रश्नकाल के दौरान कोल्हापुर जिले में बांध निर्माण में हुई करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का मामला कई सदस्यों ने उठाया था। जवाब में जलसंसाधन राज्यमंत्री विजय शिवतारे ने विखे पाटील से मुखातिब होकर कहा कि आप भी राज्य के कृषिमंत्री रहे हैं। इस पर विखे पाटील ने कहा कि कृषिमंत्री रहते भ्रष्टाचार का कोई आरोप साबित हुआ तो वे तुरंत इस्तीफा दे देंगे।
विखेपाटील ने कहा कि जलयुक्त शिवार योजना ठेकेदारों की योजना बन कर रह गई है। जल विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह भी यह बात कह चुके हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राजेंद्र सिंह ने खुद मुझे फोन किया था। उन्होंने कहा कि जलयुक्त शिवार योजना अच्छी योजना है। बस इस बात का ख्याल रखा जाए कि यह ठेकेदारों की योजना न बनने पाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
पेंशन घोटाले में दो निलंबित
नागपुर के शासकीय कोषागार में कुटुंब पेंशन में घोटाला हुआ है। इसकी जांच कराई गई है। जांच में लेखा लिपिक उपासना कंगाले दोषी पाई गई हैं। वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी है। भाजपा के सुधाकर देशमुख, कृष्णा खोपडे, विकास कुंभारे व सुधाकर कोहले ने यह सवाल पूछा था। वित्तमंत्री ने बताया कि लेखा लिपिक कंगाले ने कम्प्यूटर प्रणाली के पासवर्ड का दुरुपयोग किया है।
उन्होंने नौ कुटुंब पेंशन धारकों के बैंक खाते में बदलाव कर 20,69,854 रुपए अपने एक रिश्तेदार के बैंक खाते में जमा कर दिया था। जांच में यह गबन सामने आया। श्रीमती कंगाले के खिलाफ पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया है। कंगाले को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरु की गई है। प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर इस प्रकरण के लिए जिम्मेदार अतिरिक्त कोषागार अधिकारी डीएम चव्हाण को भी निलंबित कर दिया गया है।
सीबीएसई कोर्स में महापुरुषों के विचारों को शामिल करने सरकार करेगी प्रयास 
राज्य के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि महाराष्ट्र में जन्में महापुरुषों के विचारों को केंद्र के सीबीएसई बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल कराने के लिए सरकार प्रयास करेगी। शुक्रवार को विधान परिषद में उन्होंने कहा कि सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड राज्य सरकार के अधीन नहीं है। इसलिए इसके लिए उन्हें केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति इरानी से चर्चा करनी होगी। 
प्रश्नकाल में राष्ट्रवादी कांग्रेस सदस्य प्रकाश गजभिये ने इस संबंध में सवाल पूछा था। जबाव में शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के पाठ्यक्रमों में छत्रपति शिवाजी महाराज, डा. बाबासाहब आंबेडकर, महात्मा ज्योतिराव फूले, सावित्रीबाई फूले और राजर्षी शाहू महाराज, लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे सहित अन्य महापुरुषों के विचारों को शामिल किया गया है।
इन महापुरुषों की किताबें बड़े पैमाने पर बिकती हैं। अब सदस्यों की मांग को देखते हुए केंद्रीय बोर्ड से इन महापुरुषों के विचारों को शामिल कराने के लिए प्रयास किया जाएगा। इसी दौरान सभापति रामराजे निंबालकर ने कहा कि महापुरुषों के विचारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए स्कूलोंं में अलग से क्लास होनी चाहिए। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार इसके लिए प्रयास करेगी।

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