Monday, 25 July 2016

रफ्तार पकड़ेगा आैद्योगिक विकास

नागपुर. बरसों से चली आ रही पृथक विदर्भ राज्य की मांग के पर्याय के रूप में सरकार ने विदर्भ का सर्वांगीण विकास करने का राग अलापना शुरू कर दिया है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने विदर्भ के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए उसका औद्योगिक विकास करने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार प्रत्येक जिले का औद्योगिक दृश्य सामने रखकर विदर्भ का औद्योगिक विकास किया जाएगा। विदर्भ के साथ मराठवाड़ा को भी इसमें शामिल किया गया है।
इसके लिए नागपुर के  विभागीय आयुक्त अनूप कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।

समिति तय करेगी कि पिछड़े क्षेत्रों में सामर्थ्य, फायदे और अवसर कैसे मिल सकते हैं। समिति में अमरावती और औरंगाबाद के विभागीय आयुक्त भी सह-अध्यक्ष होंगे। 20 सदस्यीय इस समिति में सह संचालक उद्योग, नागपुर एमआईडीसी के मुख्य अभियंता, औरंगाबाग एमआईडीसी के मुख्य अभियंता, वीआईए के प्रतिनिधि आदि शामिल रहेंगे। समिति नागपुर, अमरावती व औरंगाबाद विभाग के प्रत्येक जिले के विविध कार्यालयों की जानकारी एकत्रित कर व उद्योग क्षेत्र के संगठन चेंबर ऑफ कॉमर्स, उद्योग, व्यवसाय व व्यापारी वर्ग से संबंधित संगठनों के साथ बैठक कर अवसर व उपयोगिता का अध्ययन करेगी।


प्रत्येक जिले के बीमार उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए अपनाए गए तरीकों को भी देखा जाएगा। कुछ विशिष्ठ के लिए जैसे खनिज उद्योग विकास, कृषि उद्योग विकास, स्वयंचलित उद्योग विकास, सुरक्षा उद्योग विकास आदि उद्योगों को गति देने के िलए विविध योजना भी बनेगी। इसके अलावा विभागों के लिए विशेष लाभ देने के लिए सिफारिश करेगी। समिति को 6 महीने में अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
कुछ समय पहले राज्यपाल कार्यालय ने नियोजन विभाग से विदर्भ की आर्थिक स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी। उस समय कुछ उम्मीदें जरूर जाग गई थी। किंतु आगे बात नहीं बढ़ी। जानकारों का कहना है कि सरकार ने औद्योगिक विकास करने के लिए समिति का गठन कर, पृथक विदर्भ की मांग करने वालों की उम्मीदों पर फिर पानी फेर दिया है।


समिति का गठन क्यों

सरकार का कहना है कि पुणे, मुंबई और नाशिक क्षेत्र में औद्योगिकीकरण के कारण  इन क्षेत्रों पर काफी दबाव बढ़ गया है। भीड़ बढ़ गई है। ऐसे में इसका विकेंद्रीकरण जरूरी है। इसे ध्यान में रखकर औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े विदर्भ व मराठवाड़ा क्षेत्र का विकास कर, राज्य का संतुलित औद्योगिक विकास करने की योजना है। इसके लिए इन क्षेत्रों के प्रत्येक जिलों का औद्योगिक दृष्टि से अध्ययन होना आवश्यक है। 

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