Wednesday, 18 May 2016

सीबीआई को सौंपी जाएगी डिब्बा कारोबार की जांच, बड़े राजनेता भी हैं शामिल

नागपुर. उपराजधानी का डिब्बा कारोबार पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच आर्थिक अपराध शाखा पुलिस कर रही है। अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाने वाली है। इस बारे में डिब्बा कारोबार प्रकरण से जुड़े जांच अधिकारियों की पुलिस आयुक्त शारदा प्रसाद यादव के साथ बैठक जारी है। आरोपियों का पीसीआर समाप्त होते ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

अब तक 8 प्रकरण दर्ज

यह जानकारी मंगलवार को अपराध शाखा पुलिस कार्यालय में उपायुक्त द्वय रंजनकुमार शर्मा और दीपाली मासिरकर ने दी। उन्होंने बताया कि अब तक 8 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें रमेश पात्रे, गोविंद सारडा, कुशल लद्दड, प्रीतेश लाखोटिया, अश्विन बोरीकर, विकास कुबडे, स्वप्निल पराते, िवजय गोखलानी, नीरज अग्रवाल और निमित मेहता शामिल हैं। इन आरोपियों का गुरुवार तक पीसीआर है।

आएंगे चौंकाने वाले नाम

पत्र-परिषद में बताया गया कि 20 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। प्रकरण में कुछ बड़े नेता भी शामिल हैं। उनका नाम जल्द सामने आ जाएगा। पुलिस ने अब तक की कार्रवाई में 34 हार्डडिस्क, दो बड़े सर्वर, डिवाइस जब्त की है। इस प्रकरण के लिए ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और आयकर विभाग को भी सूचित किया जाएगा। इन आरोपियों में आयकर भरने वालों के नाम का रिकार्ड भी खंगालने को कहा गया है।

गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की जानकारी मंगाई गई है। शर्मा और मासिरकर ने कहा कि यह कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा पुलिस ने की। उसके बाद सेबी को सूचित किया। सेबी को पहले जानकारी नहीं थी। पुलिस ने जो हार्डडिस्क जब्त की है। उसकी विशेषज्ञों से जांच कराई जाने वाली है। उसमें से कुछ खास पुलिस के हाथ लग सकता है।

13 वर्ष से चल रहा कारोबार

नागपुर में सैकड़ों करोड़ का डिब्बा कारोबार करीब 13 वर्ष से शुरू है। इस व्यवसाय में कम समय में करोड़पति बनने की लालसा में कई राजनेता भी  इसमें शामिल हो गए हैं।

फॉरेन्सिक लैब की रिपोर्ट का इंतजार

आर्थिक अपराध शाखा पुलिस की छापामार कार्रवाई के बाद वर्धमान नगर के रवि अग्रवाल के एल-7 समूह के कार्यालय से कम्प्यूटर व अन्य स्थानों से हार्डडिस्क पुलिस ने जब्त किया है। कुछ लिखित दस्तावेज भी जब्त किए हैं। हार्डडिस्क और  सर्वर को फॉरेन्सिक लैब में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट मिलते ही प्रकरण में बड़ा खुलासा हो सकता है।

दुबई कनेक्शन पक्के!

डिब्बा कारोबार का कनेक्शन दुबई तक जुड़ा है। इस संबंध में पुलिस को जानकारी मिल चुकी है। दुबई से डिब्बा कारोबार का संचालक कौन है? इस बारे में पुलिस ने टाल-मटोल जबाब दिया।  रवि अग्रवाल का  साला दुबई में सॉफ्टवेयर कंपनी चलाता है। यह जानकारी दी गई। डिब्बा कारोबार में करोड़ों रुपए का कारोबार रोजाना होता है। मासिरकर ने कहा कि यह इंटर स्टेट क्राइम है। इसके बारे में सारी जानकारी एक साथ मिल पाना आसान  नहीं है। पत्र-परिषद में यह भी बताया गया कि नीरज अग्रवाल के पास के बंदूक का नगालैंड का लाइसंेस है। वह अप्रैल माह में रिन्यूअल किया गया है। 

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