अब सोलर एनर्जी से चलेंगे महाराष्ट्र के गवर्नमेंट ऑफिस, एक महीने में होगा लागू
मुंबई. बिजली की लगातार बढ़ रही मांग के मद्देनजर राज्य की युति सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। इसके लिए ऊर्जा विभाग अपारंपरिक ऊर्जा नीति तैयार कर रहा है। एक माह के भीतर यह नीति लागू कर दी जाएगी। नई नीति के तहत सरकारी कार्यालयों में सौर ऊर्जा को अनिवार्य किया जाएगा। केंद्र सरकार ने भी 2040 तक देशभर में सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया है।
महाराष्ट्र सरकार ने आगामी तीन सालों के दौरान साढ़े सात हजार मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है।राज्य के ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भास्कर से बातचीत में बताया कि सरकारी कार्यालयों की छत पर सौर ऊर्जा पैनल लगाना अनिवार्य किया जाएगा। जिससे सरकारी कार्यालयों की बिजली की जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हो सके।
परियोजना लगाना चाहती हैं विदेशी कंपनियां : मंत्री ने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां राज्य में सौर ऊर्जा परियोजना लगाने के लिए उत्सुक हैं। जिनमें जर्मनी की इंस्पिरा सोलर, यूके की सेंसेस एनर्जी, इगलैंड की सोहाधा एनर्जी शामिल हैं। इसके अलावा कई देशी कंपनियों अदानी पावर, रिलायंस एनर्जी, सुजलान एनर्जी, ओंकार सोलर एनर्जी, संजीव गोयनका ग्रुप, ग्लोबल एनर्जी, स्पार्क ग्रीन एनर्जी जैसी कंपनियों ने राज्य में सौर ऊर्जा परियोजना लगाने में रुचि दिखाई है।
नासा की वेबसाईट पर महाराष्ट्र का रेडिएशन स्तर : अमेरिकी की शीर्ष वैज्ञानिक संस्था नासा की वेबसाईट पर महाराष्ट्र के सौर किरण रेडिएशन की मैपिंग की गई है। इसमें राज्यभर में रेडिएशन कि स्थिति की जानकारी दी गई है। इससे महाराष्ट्र में जगह-जगह रेडिएशन के स्तर के बारे में जानकारी मिलती है। ऊर्जा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सौर ऊर्जा परियोजना लगाने के लिए दुनियाभर की कंपनियां रेडिएशन का स्तर देख कर सौर ऊर्जा परियोजना लगाने के लिए जगह का चयन करती हैं।
ये हैं सौर ऊर्जा की चार परियोजनाएं
धुले, साकरी, चंद्रपुर व बारामती में। जिससे 270 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।
क्या है वजह
महाराष्ट्र में 15 से 16 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत। फिलहाल राज्य में 14 से 15 हजार मेगावाट बिजली उपलब्ध। बिजली की कमी व बिजली की ऊंची कीमतों की वजह से उद्योग पड़ोसी राज्यों में पलायन कर रहे हैं।अपारंपरिक ऊर्जा नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। मंत्रिमंडल की अगली बैठक में इसे रखा जाएगा। उम्मीद है कि एक माह के भीतर यह नीति लागू हो जाएगी। - चंद्रशेखर बावनकुले, ऊर्जा मंत्री

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